नई दिल्ली में केंद्र सरकार का प्रशासनिक ढांचा तेजी से बदल रहा है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत तैयार हो रहा सेवा तीर्थ-कर्तव्य भवन अब नए ‘पावर सेंटर’ के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह है कि इसकी डिजाइन और सोच, दशकों पुराने नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से कितनी अलग है?
🏗️ सेवा तीर्थ-कर्तव्य भवन में क्या है खास?
1️⃣ मॉडर्न आर्किटेक्चर + भारतीय पहचान
नई इमारतों में आधुनिक डिजाइन के साथ भारतीय स्थापत्य के तत्व जोड़े गए हैं। लाल और क्रीम पत्थर का उपयोग, चौड़े गलियारे और खुला लेआउट इसे पारंपरिक औपनिवेशिक ढांचे से अलग बनाते हैं।
2️⃣ एकीकृत मंत्रालय परिसर
जहां पहले अलग-अलग मंत्रालय शहर के अलग हिस्सों में फैले थे, वहीं अब कई मंत्रालय एक ही परिसर में काम करेंगे। इससे फाइल मूवमेंट और समन्वय तेज होगा।
3️⃣ ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट 🌱
ऊर्जा दक्षता, सोलर पैनल, वर्षा जल संचयन और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली—नई इमारत को पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है।
4️⃣ डिजिटल और स्मार्ट ऑफिस
पेपरलेस वर्किंग, हाई-टेक मीटिंग रूम और सुरक्षित आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर इसे 21वीं सदी के प्रशासनिक मॉडल के अनुरूप बनाते हैं।
🏛️ नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से कितना अलग?
नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था। इनकी वास्तुकला औपनिवेशिक शैली की है—ऊंचे गुंबद, पत्थर की नक्काशी और विशाल प्रांगण इसकी पहचान हैं।
🔹 पुरानी इमारतें:
- 1930 के दशक में निर्मित
- वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय जैसे प्रमुख विभागों का मुख्यालय
- सीमित स्पेस और पुरानी संरचना
🔹 नई इमारत (कर्तव्य भवन):
- आधुनिक और कार्यात्मक डिजाइन
- अधिक क्षमता और टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली ढांचा
- मंत्रालयों का केंद्रीकरण
विशेषज्ञों के अनुसार, जहां नॉर्थ और साउथ ब्लॉक ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक हैं, वहीं कर्तव्य भवन प्रशासनिक दक्षता और भविष्य की जरूरतों का प्रतिनिधित्व करता है।
🌏 क्या बदलेगा सत्ता का संचालन?
नई व्यवस्था से उम्मीद है कि:
- मंत्रालयों के बीच समन्वय बेहतर होगा
- निर्णय प्रक्रिया तेज होगी
- कार्य संस्कृति में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
हालांकि, सेंट्रल विस्टा परियोजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी हुई है—कुछ इसे आधुनिक भारत की जरूरत बताते हैं, तो कुछ इसे विरासत पर असर मानते हैं।
✍️ निष्कर्ष
सेवा तीर्थ-कर्तव्य भवन केवल एक नई इमारत नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत है। जहां नॉर्थ और साउथ ब्लॉक भारत के इतिहास की गवाही देते हैं, वहीं नया ‘पावर सेंटर’ भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

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